RJSURABHISAXENA: काव्य-जगत
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मेरे सनम जैसा है

Sunday, February 12, 2017
मेरा आज का चाँद बिलकुल मेरे सनम जैसा है मेरे मन का सारा हाल बिलकुल तेरे मन के जैसा है हथेलियाँ जब छू गयी थी तुमको तब से तन मेरा च...Read More

वक़्त के सांचे में

Wednesday, January 25, 2017
वक़्त के सांचे में, तू ढलती भी नहीँ रेती जैसे हाथ से फिसलती भी नहीं तू भी दरिया से समंदर हो सकती है क्यों संग दरिया के तू भी बहती नही...Read More

मन

Monday, November 21, 2016
बड़ा नादान मन है ....   कभी बच्चा सा मन कभी शैतान मन है कभी मेरा हुआ तो कभी हारा भी मन है कभी कच्चा हुआ तो कभी सारा भी मन है कभी ते...Read More

मंज़िल से मिला दे

Monday, November 21, 2016
मेरी मंज़िल से मिला दे, ऐ आसमाँ मुझको मेरी चाहत से मिला दे, ऐ आसमां मुझको रंग बनके मिलूंगा, जिस्म की रूह से अब तो मेरी राहत से मिला दे, ऐ ...Read More

आज़ाद ही होना है तो

Monday, August 15, 2016
आज़ाद ही होना है अब तो आज़ाद करो ख़ुद को सब से सब से जुदा कुछ काम करो नारी का सम्मान करो ।। अपने मन में राम रखो।। बिटिया को शिक्षा धन ...Read More

लाल रंग

Sunday, April 10, 2016
ज़ख्मों से रिस न जाएँ कहीं ये लाल रंग नफ़रतों को ज़िंदा न कर दे, ये तंग रंग !! तितलियों को हमने जैसे कि धर दबोचा मासूमियत में पसरा, ये पूरे ...Read More
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