नमन तुम्हें नारी ।।
तुम एक माँ हो
हो एक बहन
पत्नी हो तुम्हीं
हो मृदुल प्रेमिका सी
मिली एक सखी सी
चंचल एक सहेली हो
तुम कहाँ अकेली हो
संपूर्ण शक्ति का आधार हो
प्रेम। मोहब्बत। प्यार हो।।
नव जीवन संचार हो ।।
हर दुख सह जाती हो
ऐ सब कैसे कर पाती हो
ममता की भरी गगरिया तुम
धानी एक चुनरिया तुम
तुम जीवन धन्य बनाती हो
हर दुःख सह जाती हो
नारी तुम अर्धांगनी बनकर
जीवन तमस मिटाती हो ।।
हर दुख सह जाती हो
ऐ सब कैसे कर पाती हो
प्रकृति से तुमने सब रंग लिये
ग़जब से सारे ढंग लिए
नमन तुम्हें नारी ।।
तुम माँ हो शक्ति हो
पूजनीय भक्ति हो ।।।
सुरभि सक्सेना
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