उम्मीद - RJSURABHISAXENA

उम्मीद

एक उम्मीद के सहारे जिंदा रहते थे कभी
अब वो चिराग भी दम लेने को है

खुशबुओं की तरह वो आसपास ही रहा
अब मिट रहा है उजाले में जुगनुओं की तरह

3 comments:

  1. एक उम्मीद के सहारे जिंदा रहते थे कभी
    अब वो चिराग भी दम लेने को है

    dono hee sher bade kargar hain par upar wala jyada pasand aaya.

    ReplyDelete
  2. एक उम्मीद के सहारे जिंदा रहते थे कभी
    अब वो चिराग भी दम लेने को है

    खुशबुओं की तरह वो आसपास ही रहा
    अब मिट रहा है उजाले में जुगनुओं की तरह

    bahut khoob ....!!

    ReplyDelete

RJ Surabhii Saxena. Powered by Blogger.