तुम्हारा प्यार माँगा है
कभी हमने ज़माने से कोई अपना नही माँगा
कभी हमने गुलों से भी कोई गुलज़ार नही चाहा
कभी हमने चंदा से मन की शीतलता नहीं मांगी
तुम्हारे सामने झुकते है,क्योंकि तुम्हें अपना समझते है
तुम्हें अपना ही माना है, तुम्हारा सज़दा करते है
समेट लो अपनी बाहों में, तुमसे बस तुम्हारा प्यार माँगा है
गगन की भांति फैल कर जो मुझे विशालता का मान दे पाए
मधुर मीठी धुनों सा जो मुझे सम्मान दे पाए
अब मेरे हो तुम अब हम तुम्हारे हैं,ये अभिमान दे पाए
जो गुलशन की कलियों से भी सुन्दर हो वो संसार माँगा है
समेट लो अपनी बाहों में, तुमसे बस तुम्हारा प्यार माँगा है
सुरभि
कभी हमने गुलों से भी कोई गुलज़ार नही चाहा
कभी हमने चंदा से मन की शीतलता नहीं मांगी
तुम्हारे सामने झुकते है,क्योंकि तुम्हें अपना समझते है
तुम्हें अपना ही माना है, तुम्हारा सज़दा करते है
समेट लो अपनी बाहों में, तुमसे बस तुम्हारा प्यार माँगा है
गगन की भांति फैल कर जो मुझे विशालता का मान दे पाए
मधुर मीठी धुनों सा जो मुझे सम्मान दे पाए
अब मेरे हो तुम अब हम तुम्हारे हैं,ये अभिमान दे पाए
जो गुलशन की कलियों से भी सुन्दर हो वो संसार माँगा है
समेट लो अपनी बाहों में, तुमसे बस तुम्हारा प्यार माँगा है
सुरभि
bahut hee umda...
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